उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर-पार: सचिव पंकज सिंह पर लगे गंभीर आरोपों के बाद सीडीओ को सौंपा गया ज्ञापन

यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। जब धरातल पर जनता का शोषण हो रहा हो और विकास कार्यों के नाम पर लूट मची हो, तब संबंधित अधिकारियों की चुप्पी इस बात का संकेत देती है कि कहीं न कहीं ऐसे भ्रष्ट तत्वों को मौन संरक्षण प्राप्त है। क्या ग्रामीण सिर्फ ब्लॉक के चक्कर काटने और धमकियां सुनने के लिए ही बने हैं?

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार के खिलाफ सुलगता आक्रोश: बस्ती में राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा का कड़ा रुख

  • कप्तानगंज विकासखंड का मामला: राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के युवा जिलाध्यक्ष बृजेश तिवारी ने खोला मोर्चा, मुख्य विकास अधिकारी को सौंपा कड़ा ज्ञापन।
  • फर्जी हाजिरी और सरकारी धन की लूट: पानी से भरे तालाबों में मजदूरों की फर्जी हाजिरी दिखाकर सरकारी धन गटकने के वीडियो वायरल।
  • रोस्टर गायब और अभद्रता: तय रोस्टर पर पंचायतों से नदारद रहने और ग्रामीणों से अभद्र व्यवहार करने के साथ सुविधा शुल्क मांगने का आरोप।
  • शिकायतकर्ताओं को धमकी: भ्रष्टाचार की आवाज उठाने वालों के राशन कार्ड कटवाने और सरकारी योजनाओं से वंचित करने का सनसनीखेज मामला।
  • एक सप्ताह का अल्टीमेटम: प्रशासन ने यदि निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं की, तो राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा करेगा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन।

बस्ती: विकास की गंगा बहाने के दावे करने वाले प्रशासनिक तंत्र के भीतर किस तरह दीमक की तरह भ्रष्टाचार पनप रहा है, इसकी एक बानगी कप्तानगंज विकासखंड से सामने आई है। राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के युवा जिलाध्यक्ष बृजेश तिवारी ने ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) पंकज सिंह के खिलाफ मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी की अनियमितताओं का नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों के हनन और प्रशासनिक लापरवाही का एक जीवंत दस्तावेज बन चुका है।

​ज्ञापन में लगाए गए प्रमुख बिंदु और आरोप

  • सरकारी धन का खुला दुरुपयोग: कुछ ग्राम पंचायतों में पानी से भरे तालाबों में मजदूरों की फर्जी हाजिरी दर्ज कराकर सरकारी राजकोष को चपत लगाने का गंभीर आरोप है, जिसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल बताए जा रहे हैं।
  • कर्तव्यों से फेरबदल और मनमानी: आरोपी सचिव पर निर्धारित रोस्टर के अनुसार पंचायतों में अनुपस्थित रहने और ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए ब्लॉक कार्यालय के चक्कर कटवाने की बात सामने आई है।
  • शोषण और अभद्रता: ग्रामीणों के साथ अभद्र व्यवहार करने और कार्य कराने की एवज में खुलेआम ‘सुविधा शुल्क’ की मांग करने के आरोप हैं। पैसा न देने पर सरकारी योजनाओं से वंचित करने की धमकियां दी जाती हैं।
  • आवाज़ दबाने की घिनौनी कोशिश: भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर होने वाले और शिकायत करने वाले नागरिकों को राशन कार्ड कटवाने और सरकारी योजनाओं से बेदखल करने का खौफ दिखाया जा रहा है।

​प्रशासनिक निष्क्रियता पर बड़ा सवालिया निशान

​यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। जब धरातल पर जनता का शोषण हो रहा हो और विकास कार्यों के नाम पर लूट मची हो, तब संबंधित अधिकारियों की चुप्पी इस बात का संकेत देती है कि कहीं न कहीं ऐसे भ्रष्ट तत्वों को मौन संरक्षण प्राप्त है। क्या ग्रामीण सिर्फ ब्लॉक के चक्कर काटने और धमकियां सुनने के लिए ही बने हैं?

​चेतावनी: न्याय नहीं मिला तो होगा आर-पार का संघर्ष

​राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के युवा जिलाध्यक्ष बृजेश तिवारी ने प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी सचिव के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन चुप नहीं बैठेगा। इसके बाद होने वाले अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और आक्रोश की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

​अब देखना यह है कि क्या मुख्य विकास अधिकारी इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ नकेल कसते हैं, या फिर कागजी खानापूर्ति कर भ्रष्टाचार के इन्यायालयों को और मजबूत होने का मौका दिया जाता है। बस्ती की जनता न्याय की आस में टकटकी लगाए बैठी है।

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